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जिंदगी

 जाने क्या धुन सी लगी है बस दौड़ते जा रहे हैं मंज़िल कोई नहीं है मगर राहों पर फिसलते जा रहे हैं  ठहरना अब शायद मुमकिन नहीं एहसास सारे खोते जा रहे हैं अकेले गुमराह भटकते हैं सभी  साथ रहने से गुरेज़ किये जा रहे हैं मरने की किसी को ज़रूरत नहीं  जीते जीते ही रोज़ मरते जा रहें हैं।

सब पराए थे..

 जितने अपने थे , सब पराए थे ,  हम हवा को गले लगाए थे...  जितनी कसमें थी , सब थी शर्मिंदा ,  जितने वादे थे सर झुकाए थे ,  जितने आंसू थे सब थे बेगाने..२  जितने मेहमान थे बिन बुलाए थे ।        सब किताबे पढ़ी-पढ़ाई थी ,        सारे किस्से सुने-सुनाए थे ,        एक बंजर जमीं के सीने में..२        मैंने कुछ आसमां उगाए थे । सिर्फ दो घूंट प्यास कि खातिर , उम्र भर धूप में नहाए थे , हाशिए पर खड़े हुए है हम..२ हमने खुद हाशिए बनाए थे ।                                                                  @ Deep ...✍️

समय का महत्व

 एक वर्ष की कीमत उस विद्यार्थी को पत्ता होती है ,  जो अनुतीर्ण हो गया हो । एक महीने की कीमत उस मां को पत्ता होती है, जिसने 9 महीने से पहले बच्चे को जन्म दिया हो । एक हफ्ते की कीमत उस अखबार के संपादक को पत्ता होती है, जिसे एक सप्ताहिक अखबार निकालना हो । एक दिन की कीमत उसे पत्ता होती है, जिसे कल फांसी लगने वाली हो । एक घंटे की कीमत उस प्रेमी को पत्ता होती हैं, जो प्रेमिका के पास बैठा हो । और, एक क्षण की कीमत उसे पत्ता होती हैं, जिसकी ट्रेन अभी-अभी निकल गई हो ।।      @Deep....

मृत्यु

      जीवन का विलोम नहीं ,          वरन् उसी का एक हिस्सा है..! @deep...✍️

#स्वभाव

 अपने स्वभाव को नमक की तरह बनाओ आपके होने पर  भले ही महफिल में कोई पूछे या ना पूछे लेकिन आपके ना होने पर  हर इंसान को आपकी कमी खलेगी..!
 दिन ढल गया तो रात गुज़रने की आस में, सूरज नदी में डूब गया हम गिलास में...!!! ~ राहत इंदौरी

देश हमे देता है सबकुछ..

       आजादी के अमृत महोत्सव पर दो पंक्ति .. देश हमे देता है सबकुछ..२ , हम भी तो कुछ देना सीखे ..                 सूरज हमे रौशनी देता ,                 हवा नया जीवन देती है ,                भूख मिटाने को हम सबको ,                धरती पर होती खेती है । औरों का औरों भी हित हो जिसमे , हम कुछ ऐसा करना सीखे , देश हमे देता है सबकुछ हम भी तो कुछ देना सीखे...२                पथिको को तपती दोपहर में ,                पेड़ सदा देते है छाया ,                 सुमन सुगंध सदा देते है ,                हम सबको फूलो की माला ।  त्यागी तरुओ..२ के जीवन में हम कुछ ऐसा करना सीखे, देश हमे देता है सबकुछ , हम भी तो कुछ देना सीखे ।।           ...