Posts

Showing posts from February, 2023

सब पराए थे..

 जितने अपने थे , सब पराए थे ,  हम हवा को गले लगाए थे...  जितनी कसमें थी , सब थी शर्मिंदा ,  जितने वादे थे सर झुकाए थे ,  जितने आंसू थे सब थे बेगाने..२  जितने मेहमान थे बिन बुलाए थे ।        सब किताबे पढ़ी-पढ़ाई थी ,        सारे किस्से सुने-सुनाए थे ,        एक बंजर जमीं के सीने में..२        मैंने कुछ आसमां उगाए थे । सिर्फ दो घूंट प्यास कि खातिर , उम्र भर धूप में नहाए थे , हाशिए पर खड़े हुए है हम..२ हमने खुद हाशिए बनाए थे ।                                                                  @ Deep ...✍️