देश हमे देता है सबकुछ..

       आजादी के अमृत महोत्सव पर दो पंक्ति ..

देश हमे देता है सबकुछ..२ , हम भी तो कुछ देना सीखे ..

                सूरज हमे रौशनी देता ,

                हवा नया जीवन देती है ,

               भूख मिटाने को हम सबको ,

               धरती पर होती खेती है ।

औरों का औरों भी हित हो जिसमे , हम कुछ ऐसा करना सीखे ,

देश हमे देता है सबकुछ हम भी तो कुछ देना सीखे...२

               पथिको को तपती दोपहर में ,

               पेड़ सदा देते है छाया , 

               सुमन सुगंध सदा देते है ,

               हम सबको फूलो की माला । 

त्यागी तरुओ..२ के जीवन में हम कुछ ऐसा करना सीखे,

देश हमे देता है सबकुछ , हम भी तो कुछ देना सीखे ।।

                 जो अनपढ़ है उन्हें पढ़ाए ,

                 जो चुप है उनको वाणी दे ,

                 जो पिछड़े है उन्हें बढ़ाए ,

                 प्यासी धरती को पानी दे ।

हम मेहनत की दीप जलाकर नया उजाला करना सीखे,

देश हमे देता है सबकुछ , हम भी तो कुछ देना सीखे।।

 @deep.....✍️











     

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