आजादी के अमृत महोत्सव पर दो पंक्ति .. देश हमे देता है सबकुछ..२ , हम भी तो कुछ देना सीखे .. सूरज हमे रौशनी देता , हवा नया जीवन देती है , भूख मिटाने को हम सबको , धरती पर होती खेती है । औरों का औरों भी हित हो जिसमे , हम कुछ ऐसा करना सीखे , देश हमे देता है सबकुछ हम भी तो कुछ देना सीखे...२ पथिको को तपती दोपहर में , पेड़ सदा देते है छाया , सुमन सुगंध सदा देते है , हम सबको फूलो की माला । त्यागी तरुओ..२ के जीवन में हम कुछ ऐसा करना सीखे, देश हमे देता है सबकुछ , हम भी तो कुछ देना सीखे ।। ...